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शुक्रवार, फ़रवरी 24

एक मंदिर ऐसा भी है जहा पर पैरालायसिस (लकवे ) का इलाज होता है !

एक मंदिर ऐसा भी है जहा पर पैरालायसिस
(लकवे ) का इलाज होता है !
यहाँ पर हर साल हजारो लोग पैरालायसिस (लकवे ) के रोग से
मुक्त होकर जाते है ......यह धाम #नागोर_जिले के
कुचेरा क़स्बे के पास है, अजमेर- नागोर रोड पर
यह गावं है ! लगभग ५०० साल पहले एक संत होए
थे #चतुरदास_जी वो सिद्ध योगी थे, वो अपनी
तपस्या से लोगो को रोग मुक्त करते थे ! आज
भी इनकी समाधी पर सात फेरी लगाने से लकवा
जड़ से ख़त्म हो जाता है ! नागोर जिले के
अलावा पूरे देश से लोग आते है और रोग मुक्त
होकर जाते है हर साल वैसाख, भादवा और माघ
महीने मे पूरे महीने मेला लगता है !

सन्त चतुरदास जी महाराज के मन्दिर ग्राम
बुटाटी में लकवे का इलाज करवाने देश भर से
मरीज आते हैं| मन्दिर में नि:शुल्क रहने व खाने
की व्यवस्था भी है| लोगों का मानना है कि
मंदिर में परिक्रमा लगाने से बीमारी से राहत
मिलती है|

राजस्थान की धरती के इतिहास में चमत्कारी के
अनेक उदाहरण भरे पड़े हैं| आस्था रखने वाले के
लिए आज भी अनेक चमत्कार के उदाहरण मिलते
हैं, जिसके सामने विज्ञान भी नतमस्तक है| ऐसा
ही उदाहरण नागौर के 40 किलोमीटर दूर स्तिथ
ग्राम बुटाटी में देखने को मिलता है। लोगों का
मानना है कि जहाँ चतुरदास जी महाराज के
मंदिर में लकवे से पीड़ित मरीज का राहत
मिलती है।
वर्षों पूर्व हुई बिमारी का भी काफी हद तक
इलाज होता है। यहाँ कोई पण्डित महाराज या
हकीम नहीं होता ना ही कोई दवाई लगाकर
इलाज किया जाता। यहाँ मरीज के परिजन
नियमित लगातार 7 मन्दिर की परिक्रमा
लगवाते हैं| हवन कुण्ड की भभूति लगाते हैं और
बीमारी धीरे-धीरे अपना प्रभाव कम कर देती है|
शरीर के अंग जो हिलते डुलते नहीं हैं वह धीरे-
धीरे काम करने लगते हैं। लकवे से पीड़ित जिस
व्यक्ति की आवाज बन्द हो जाती वह भी
धीरे-धीरे बोलने लगता है।
यहाँ अनेक मरीज मिले जो डॉक्टरो से इलाज
करवाने के बाद निराश हो गए थे लेकिन उन
मरीजों को यहाँ काफी हद तक बीमारी में
राहत मिली है। देश के विभिन्न प्रान्तों से
मरीज यहाँ आते हैं और यहाँ रहने व परिक्रमा देने
के बाद लकवे की बीमारी में राहत मिलती है।
मरीजों और उसके परिजनों के रहने व खाने की
नि:शुल्क व्यवस्था होती है।

दान में आने वाला रुपया मन्दिर के विकास में
लगाया जाता है। पूजा करने वाले पुजारी को
ट्रस्ट द्वारा तनखाह मिलती है। मंदिर के आस-
पास फेले परिसर में सैकड़ों मरीज दिखाई देते हैं,
जिनके चेहरे पर आस्था की करुणा जलकती है|

संत श्री चतुरदास जी महारज की कृपा का मुक्त कण्ठ
प्रशंसा करते दिखाई देते।


सोमवार, फ़रवरी 20

कु.गौरी अभी सिर्फ 11साल की उम्र में इंडियन कॉस्टिट्यूशन की 395 धाराएं याद*

👆 *अभी सिर्फ 11साल की उम्र में इंडियन कॉस्टिट्यूशन की 395 धाराएं याद*

नई दिल्ली:- केन्द्रीय मानवाधिकार संगठन,नई दिल्ली द्वारा आयोजित कार्यक्रम दिनांक 25 फरवरी 2017 को भारत रत्न डॉ बाबासाहब आंबेडकर व्यावसायिक केन्द्र ,हेडलैंड सड़ा वास्को गोवा मे भारतीय संविधान मुखागृत करने वाली नागपुर की रहनेवाली  कु.गौरी कोढे विधि रक्षा पुरस्कार से होगी संम्मानित

महज 11 साल की गौरी  संविधान की धाराएं बोलती है
उसे भारतीय संविधान कि सारे यानि 395 अनुच्छेद मुह जबानी याद है  अद्भुत, अकल्पनीय, अविश्वसनीय है ये सब। रिश्तेदार, मित्रजन, विविध माध्यमों के प्रतिनिधि, विधि क्षेत्र के जानकार हैरान है  इंडिया व एशिया बुक आफ रिकार्ड के निर्धारित समय के पहले ही एक घंटे 85 सेकंड में वाचन कर रिकॉर्ड बनाया।

इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड
एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड
वल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ इंडिया
जीनियस अवार्ड
ऐसे कई पुरस्कारों से संमन्नित कु.गौरी सन्मानित है

वाकई अनोखी प्रतिभा की धनी है गौरी। बेसा नागपुर की पाठशाला में सातवी कक्षा में है। खेलकूद की उम्र में उसे घर में खिलौने नहीं, भारतीय संविधान की पुस्तक दिखती है। मां से संविधान का महत्व सुन वह संविधान की धाराएं कंठस्थ करने लगी। स्मरण तकनीकी के टिप्स भी उसे अपनी माँ द्वारा मिली है

उसके पिता मनीष कोढे महावितरण में अभियंता हैं।

बच्चों में स्मरण शक्ति विकास के लिए ‘गौरी पैटर्न’ अपनाया जाना चाहिए।

*11साल की गौरी जब संविधान की धाराएं बोलती तब सबकी बोलती बंद हो जाती है*


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