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रविवार, मई 8

माँ उच्चारण मात्र से ही असीम वात्सल्य का सुखद अहसास ....

   

माँ उच्चारण मात्र से ही असीम वात्सल्य का सुखद अहसास होता है लेकिन माँ सर्वोपरि है माँ संतान से कभी अपेक्षा नहीं रखती उसके लिए सभी एक समान है बावजूद इसके क्या हमारा कर्तव्य नहीं बनता कि हम माँ का सम्मान करें ओर "मदर्स डे" तो मात्र एक अवसर है श्रद्धा व्यक्त करने का हमे प्रतिदिन उनका सम्मान करना चाहिए.. 
 
 मैं भी आज मेरी माँ का स्‍मरण कर रहा हूँ, जो आज हमारे बीच नहीं हैं फिर भी उनकी दी हुई शिक्षा और आदर्श हमें मार्ग दर्शन करती हैं !
"माँ की ममता कौन भुला सकता है,
 और कौन भुला सकता है वो प्यार,
 किस तरह बताए माँ के बिना कैसे जी रहए हम"
  मै और मेरा सम्पूर्ण परिवार श्रद्धा सुमन उन्हें अर्पित करते है

आज महत्वपूर्ण दिन "मदर्स डे" के मोके पर देश व दुनिया की समस्त माताओ को "सुगना फाऊंडेशन मेघलासिया जोधपुर" की ओर हार्दिक शुभकामनाएँ.. 

                *****************************                                                   






"एक्टिवे लाइफ" "आज का आगरा" ब्लॉग की तरफ से सभी मित्रो और पाठको को "मदर्स डे"की बहुत बहुत शुभकामनाये !            

24 टिप्‍पणियां:

  1. उन्हें मेरा भी नमन ..... सभी मदर्स डे को शुभकामनायें

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  2. बहुत सुन्दर शब्दों में उकेरा है आप ने अपनी भावनाओं को|

    आप के माताजी को नमन|

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  3. आपकी पोस्ट पढ़कर लगा की आज आपकी माँ को आपके साथ होना ही चाहिए था...


    क्या सीरत थी, क्या सूरत थी..
    पाँव छुए और बात बनी, अम्मा एक मुहूर्त थी...

    happy mothers day...

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  4. मातृदिवस की शुभकामनाएँ!

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  5. आपका सभी आपको भी मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाऐं.

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  6. और बहुत बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे

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  7. कितना सुंदर ....सभी प्यारी प्यारी ममाओं को हैप्पी मदर्स डे

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  8. बहुत सुन्दर भावों के साथ माँ की याद को सजाया है । मातृ दिवस की बधाई । धन्यवाद ।

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  9. यद्यपि माँ की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता फिर भी माँ की स्मृति में भी उनका वात्सल्य छिपा होता है। मदर्स डे पर आपको भी शुभकामनायें!

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  10. बेनामी1:35 pm, मई 09, 2011

    माँ के ऊपर है सब कुछ

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  11. बेनामी1:35 pm, मई 09, 2011

    मातृदिवस की शुभकामनाएँ!

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  12. मै बहुत भाग्यशाली हूँ कि मुझे एक साथ कई माँओं का प्यार मिला है

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  13. आपको भी मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाऐं.

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  14. मातृदिवस की शुभकामनाएँ

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  15. आपका सभी बहुत बहुत शुक्रिया

    उत्तर देंहटाएं
  16. सभी को मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाऐं.

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  17. आपको भी शुभकामनायें!

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  18. प्रिय बंधुवर सवाई सिंह जी
    सादर अभिवादन !


    निस्संदेह हमे प्रतिदिन मां का सम्मान करना चाहिए …



    आपके मंगलमय जीवन के लिए हार्दिक शुभकामनाएं !

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  19. बेनामी6:14 pm, जून 30, 2011

    माँ संवेदना है, भावना है, अहसास है
    माँ जीवन के फूलों में, खूशबू का वास है
    माँ रोते हुए बच्चे का, खुशनुमा पालना है
    माँ मरूस्थल में नदी या मीठा-सा झरना है
    माँ लोरी है, गीत है, प्यारी-सी थाप है
    माँ पूजा की थाली है, मंत्रो का जाप है
    माँ आँखो का सिसकता हुआ किनारा है
    माँ ममता की धारा है, गालों पर पप्पी है,
    माँ बच्चों के लिए जादू की झप्पी है
    माँ झुलसते दिनों में, कोयल की बोली है
    माँ मेंहँदी है, कुंकम है, सिंदूर है, रोली है
    माँ त्याग है, तपस्या है, सेवा है
    माँ फूंक से ठंडा किया कलेवा है
    माँ कलम है, दवात है, स्याही है
    माँ परमात्मा की स्वयं एक गवाही है
    माँ अनुष्ठान है, साधना है, जीवन का हवन है
    माँ जिंदगी के मोहल्ले में आत्मा का भवन है
    माँ चूड़ीवाले हाथों के, मजबूत कंधो का नाम है
    माँ काशी है, काबा है, और चारों धाम है|

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  20. " माँ": एक अहसास : एक पूर्णता !

    यह समझने की नितांत आवश्यकता है कि आखिर यह "माँ" है क्या ?
    माँ है जननी,माँ है पालिनी,माँ है दुलारिनी.माँ क्या नहीं है! माँ तो संतान की छाया है,माँ तो संतान की तस्वीर है,तकदीर है,तज़बीज़ है......
    ज़रा सोचिये, माँ नहीं तो हम कहाँ ? हम नहीं तो हमारा "अहम्" कहाँ ? अरे इसी अहम् के लिए तो जीते हैं हम !
    यह नक्की मान लें कि माँ का एक-एक अंश हमारे में है.क्या-क्या अलग कर सकते हैं हम ? सच्ची बात तो यही है कि कुछ भी नहीं...... "गीले में सोने और सूखे में सुलाने" की बातें तो पुरानी हो गयी है ना ! पर क्या ऐसी बातों को बदल सकते हैं हम ?
    अरे किसी मादा पशु के भी, अगर हम उसके जन्म लेते बच्चे के समय, पास से फटक जाएँ तो वह "दिन में तारे" दिखा देती है. भला क्यों ?वह तो मूक पशु मात्र ही तो है ! परन्तु हम भूल रहे हैं कि वह "माँ" है !!!!
    पुरानी कहावत है कि माँ का एक रात का भी क़र्ज़ नहीं चुका सकते हैं हम.पर कोई माँ क़र्ज़ चुकाने का कहती भी है क्या ? अरे सिर्फ वह तो " फ़र्ज़ ही तो याद दिलाती है ना !!
    कहाँ हक की लड़ाई लड़ रहे हैं हम ! कर्तव्य की बातें तो हमें सुहाती ही नहीं !!!!
    आएये माँ की रक्षा का संकल्प करें.बदले में दुलार ही दुलार,आशीर्वाद ही आशीर्वाद ,प्यार ही प्यार ,पोषण ही पोषण..........

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