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* आपका एक्टिवे लाइफ में स्वागत है * "वन्दे मातरम्" आपके सुझाव और संदेश मुझे प्रोत्साहित करते है! आप अपना सुझाव या टिप्पणि दे!* मित्रो...गौ माता की करूँ पुकार सुनिए और कम से कम 20 लोगो तक यह करूँ पुकार पहुँचाईए* गौ ह्त्या के चंद कारण और हमारे जीवन में भूमिका....
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शनिवार, जून 4

सात फेरे होंगे पर नहीं होगा दूल्हा 11 जून को खुद से ही शादी रचाएंगी क्षमा

 देश की पहली अनोखी शादी जिसके बारे में आपने अभी तक नहीं सुना होगा..

कुछ समय पहले मेरे ब्लॉग आज का आगरा में आपने पढ़ा था जीवन में खुश रहना है अकेले रहिए बहुत से पाठको ने उसे अपना प्यार दिया। जिसे मैंने अपने जीवन में प्रैक्टिकल अनुभव करने के बाद लिखा था और मैंने उसे अपने जीवन में फॉलो किया है। एक बार आप भी यह आर्टिकल जरूर पढ़िएगा... आप खुद से प्यार कीजिए आपको बहुत कुछ मिलेगा। अब शुरू करता हूं आज की पोस्ट.....

वैसे तो आमतौर पर शादी हमेशा दो लोगों के बीच होने वाला बंधन है लेकिन मैं आपको जिस खबर के बारे में बताने जा रहा हूं वह थोड़ा सा आपको अनोखी जरूर लगेगी लेकिन खबर 100% सत्य है जी हां हम बात कर रहे हैं गुजरात राज्य के वड़ोदरा शहर में होने वाली शादी की अब तक आपने देखी होगी बहुत सी शादिया पर यह बिल्कुल अनोखी होने वाली है शादी जी हां मैंने तो पहली बार ही सुना है बात करते हैं वड़ोदरा की एक शादी के बारे में एक शादी में दुल्हन और दूल्हा एक ही लड़की है जी हां वड़ोदरा की रहने वाली 24 वर्षीय क्षमा जिसने खुद से ही शादी करने का फैसला जो किया है और उनका पूरा परिवार भी राजी हो गया है उनकी इच्छा को पूरा करने के लिए हालांकि जो भी इस खबर को पढ़ेगा वह चौकने वाला है।

यह अनोखी शादी 11 जून 2022 को होने वाली है ओर वह खुद के साथ शादी करेंगे टाइम्स ऑफ इंडिया के रिपोर्ट के अनुसार क्षमा ने अपनी शादी के लिए लहंगे से लेकर ज्वेलरी तक सब कुछ खरीद लिया है। दुल्हन बनकर मंडप में बैठने की तैयारियां है हालांकि उसके साथ फेरे लेने के लिए दूल्हा नहीं होगा। उन्होंने हनीमून की तैयारियां भी करनी है वह अपना हनीमून गोवा में मनाने जा रही है अधिकांश लोगों के लिए अविश्वसनीय खबर हो सकती है लेकिन शादी पारंपारिक अनुष्ठान के साथ होने वाली है। श्रमा को मैंने इंस्टाग्राम पर फॉलो किया है ताकि इस शादी से जुड़े अन्य अपडेट भी मैं आप लोगों को दे सकूं। कई लोग प्यार और धोखे से इतने परेशान हो जाते हैं उन्हें मजबूरन अपने साथ ही रहना अच्छा लगने लगता है मेरे ख्याल से क्षमा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ होगा तभी उन्होंने इतना बड़ा फैसला लेने का मन बनाया होगा। हालांकि ऐसी शादियो को कानून प्रणाली मान्यता नहीं देती है। 

खबर की पुष्टि के लिए न्यूज़पेपर के कुछ कटिंग आप लोगों के साथ शेयर कर रहा हूं।



अब आप मुझे सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर फॉलो कर सकते हैं। जहां पर हर रोज मिलेगा आपको कुछ नया ...

फिर मिलता हूं। किसी ने नई पोस्ट के साथ तब तक के लिए इजाजत दीजिए ....आपका सवाई सिंह राजपुरोहित



रविवार, मई 22

ट्रैफिक पुलिस वाले ने अपनी इंसानियत का परिचय जरूर दिया

हेलो मेरे प्यारे पाठको और प्यारे दोस्तों आप सब कैसे हैं आशा करता हूं आप सभी अच्छे होंगे आज की जो तस्वीर मैं आपके साथ साझा करने जा रहा हूं वह एक ट्रैफिक पुलिस वाले की जिन्होंने इंसानियत का परिचय दिया है कई बार हमारे आसपास में ऐसी घटनाएं होती है जिससे हम सब को प्रेरणा लेनी चाहिए होती है पर हमें भी कुछ ऐसा करने का प्रयास करना चाहिए इस पोस्ट को करने का एकमात्र उद्देश्य मेरा यही है कि कोई एक तो इससे प्रेरणा जरूर लेगा।

जल रही है जमीं जरा अपना खयाल रख।

 जूते है मेरे पास,आ तू मेरे पांव पर पांव रख।

तस्वीर पता नहीं कहां की है, लेकिन इस ट्रैफिक पुलिस रंजीत सिंह ने अपनी इंसानियत का परिचय जरूर दे दिया, ये गरीब बच्चे भरी दोपहरी में नंगे पांव थे और सड़क पार नहीं कर पा रहे थे,जब तक सड़क खाली नहीं हुई, तब तक इस पुलिस वाले ने उनके नंगे पैरों को अपने जुत्तो पर खड़े रखा, और बाद में इनको चप्पल भी दिलवाई ! सोशल मीडिया पर इस ट्रैफिक अधिकारी को खूब वाह वाही मिल रही है ! सच में सैल्यूट रंजीत सिंह सर

क्या लिखा इन्होंने अपनी सोशल मीडिया पर

ट्रैफ़िक पुलिस के इस सिपाही का नाम रंजीत सिंह है। 2 बच्चे रोड क्रॉस कर रहे थे सिग्नल बंद था बच्चे के पाँव जल रहे थे। बच्चे ने कहा- सर पाँव जल रहे हैं, रोड क्रॉस करवा दो, रंजीत ने कहा- जब तक ट्रैफ़िक रुकता नहीं मेरे पैर पर पैर रख लो” 

सिपाही रंजीत सिंह ने अपने फ़ेसबुक पर लिखा है- जैसे ही उस बच्चे ने मेरे पैरों पर पाँव रखा, मुझे ऐसा लगा जैसे भगवान ने मेरे ऊपर पाँव रख दिए। मैंने चप्पल ख़रीद के दे तो दीं पर आज का ये अहसास ज़िंदगी भर याद रहेगा..!

प्रिय पाठकों मैं चाहता हूं आप इस इंसानियत को पहचाने 

“अपने आसपास घट रही छोटी-छोटी घटनाओं से प्रेरणा व सकारात्मकता की उर्जा फैलाए और समाज और लोगों के बीच एक प्रेरणादायक संदेश आप पहुंचाने का प्रयास करें ।

सोमवार, मार्च 29

साल भर आपकी जेब इन सातों रंग से भरी रहे यही मेरी होली की हार्दिक शुभकामनाएं हैं।

 Aap Sabhi mitron parivarik janon ko Holi ke mahaparv ki hardik shubhkamnaen yah Sal aapke liye Hamesha Ki Tarah aur behtarin sal ho aapko Unnati aur tarkki Karen Aisi main upar wale the Dua karta hun . 

Radha Ka Rang Aur Kanha Ki Pichkari
Pyaar Ke Rang Se Rang Do Duniya Sari
Ye Rang Na Jane Koi Jaat Na Koi Boli
Mubarak Ho Aapko Rang Bhari Holi

Suganna Foundation Parivari ki taraf se Holi ki hardik shubhkamnaen......

saal Bhar aapki Jeb in sato rangon Se Bhari Rahe Yahi Meri Holi ki hardik shubhkamnaen..






गुरुवार, मार्च 11

प्रेम के लिए रुतबा नही। एक दिल ही काफी है

 करुणा ही सृष्टि का आधार है, जब जब धरती से करुणा, दया, सहयोग की जितनी मात्रा मनुष्य कम करेगा उसे कुदरत के कोप का शिकार भी उतनी मात्रा में होना पड़ेगा। 

इसलिए मनुष्य को इस प्रकार के कार्य सदैव करते रहना चाहिए प्रेम के लिए रुतबा नहीं सिर्फ एक छोटा सा दिल ही काफी है यह फोटो मैंने फेसबुक पर देखा सोचा आप लोगों के साथ शेयर करूं



शनिवार, मार्च 6

लॉकडाउन का सही इस्तेमाल करते हुए बनाई अपनी एक अलग पहचान।

जैसा कि आप सभी को मालूम है 8 मार्च को महिला दिवस आ रहा है अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आज की यह पोस्ट विशेष ... 

 समय बदल रहा है। महिलाएं पुरुषों के साथ साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी धाक जमाई है। परिवार के साथ समाजसेवा में भी वह पीछे नहीं हैं। शहर में कई महिलाएं ऐसी भी हैं जो परिवार के साथ समाजसेवा में भी जुटी हैं। इसके बूते उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई हैं। 

एक ओर जहां लॉकडाउन में महिलाएं, अपने घरों के कामों में व्यस्त थी वहीं दूसरी तरफ "श्रीमती शशी सोंखिया" अपने इस समय का सही इस्तेमाल करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई।

श्रीमती शाशी ने इंस्टाग्राम पर @talkwithsimmy पेज से वह एक प्रेरक वक्ता और फ्रीलांसर पत्रकार के रूप में ऑनलाइन कार्य कर रही हैं। अपने परिवार की जिम्मदारियो के साथ साथ वह दूसरों को भी उनकी परेशानियों से सम्बन्धित सही सलाह देते हुए उनकी सहायता कर उनकी मदद कर रही हैं।

इस पेज को शुरू करने का उनका एक ही मकसद है कि "वह दूसरों की ज्यादा से ज्यादा मदद कर सके।"

अभी तक वह 28 से ज्यादा लाइव सत्र और 200 से ज्यादा लोगो की मदद कर चुकीं है ओर आगे भी करते रहना चाहती हैं।

 श्रीमती शशि सोंखिया ने बताया इसकी प्रेरणा उनको सामाजिक संगठन सुगना फाउंडेशन मेघलासिया की अध्यक्षा श्रीमती संतोष राजपुरोहित से मिली और वह चाहती हैं कि उनके जैसी और भी शादीशुदा महिलाएं अपनी रुचि के अनुरूप कार्य करे। 

श्रीमती शशी सोंखिया (नवी मुंबई महाराष्ट्र भारत).


SM series 2 se

शुक्रवार, मार्च 5

मिठाइयों पर गौर कीजिए, कुछ ना कुछ संदेश देती है..

 हमारी मिठाइयों पर गौर कीजिए, कुछ ना कुछ संदेश देती है..😊😇

जैसे


1️⃣ जलेबी

आकार मायने नहीं रखता, स्व भाव मायने रखता  है, 

जीवन मे उलझने कितनी भी हो, रसीले और मधुर रहो॰॰


2️⃣ रसगुल्ला

कोई फर्क नहीं पड़ता कि,

जीवन आपको कितना निचोड़ता है,

अपना असली रूप सदा बनाये रखें


3️⃣ लड्डू

बूंदी-बूंदी से लड्डू बनता, छोटे-छोटे प्रयास से ही सबकुछ होता हैं!

सकारात्मक प्रयास करते रहे.


4️⃣ सोहन पापड़ी

हर कोई आपको पसंद नहीं कर सकता, लेकिन बनाने वाले ने कभी हिम्मत नहीं हारी।

अपने लक्ष्य पर टिके रहो ॰॰


5️⃣ काजू कतली

अपने आप को इतना सस्ता ना रखे,

की राह चलता कोई भी आपका दाम पूछता रहे !

आंतरिक गुणवत्ता हमें सबसे अलग बनाती है


6️⃣ गुलाब जामुन

सॉफ्ट होना कमजोरी नहीं है! ये आपकी खासियत भी है।

नम्रता यह एक विशेष गुण है


7️⃣ बेसन के लड्डू

यदि दबाव में बिखर भी जाय तो, फिरसे बंधकर लड्डु हुआ जा सकता है।

परिवार में एकता बनाए रखें ॰॰


आप सभी का हर दिन, इन्हीं मिष्ठान्नों की भाँति, मधुर एवं मंगलमय हो...🙏😊

शुक्रवार, सितंबर 27

माँ की गोद से नीचे उतरो तो पता चले कि दुनिया कितनी क्रूर और निर्दयी है

     बाप के बने घर से बाहर निकलो तो पता चले कि दुनिया मे कितना संघर्ष करना पड़ता है और माँ की गोद से नीचे उतरो तो पता चले कि दुनिया कितनी क्रूर और निर्दयी है...
#निःशब्द
  
        यह दुनिया बहुत जालिम है और दोस्तों आपको जीवन में संघर्ष तो हमेशा करते ही रहना है तभी आप आगे बढ़ पाएंगे क्योंकि यह दुनिया शरीफ लोगों को तो जीने भी नहीं देती गुलाम बने रहोगे तो जिंदगी को आगे जीने का मौका मिलता रहेगा लेकिन मेरा मानना है कि गुलामों की जिंदगी से जीने से अच्छा है संघर्ष की जीवन जियो...

...✍ और चलते चलते यह दो शब्द जो मेरे दिल के भाव है हमेशा करने का प्रयास करता हूं और आगे भी करता रहूंगा अपनी वाणी इन दो शब्दों के साथ खत्म करता हूं।

छू ना सको "आसमान" 
तो ना सही ....

किसी के "दिल" को छूने का आनन्द भी आसमान छूने से कम नहीं ।


        

मंगलवार, सितंबर 3

मंदी का रोना मत रोइए, यूं कहिए *ईमानदारी* से कमाने में मेहनत ज्यादा करनी पड़ रही है

मंदी है तो, किसने अपना 20 हजार का स्मार्टफोन फोन बेचकर बटन वाला फोन लिया?

मंदी है तो, किसने अपनी बड़ी कार बेचकर छोटी कार खरीद ली?

मंदी है तो किसने अपने बच्चों को महंगे स्कूल से हटाकर सरकारी स्कूल में लगवाया है?

मंदी है तो किसने  होटलोंसे खाना मंगवाना बन्द कर दिया है??

मंदी है किसने मल्टीप्लेक्स में फिल्में देखना बन्द कर दिया है?

मंदी का रोना मत रोइए, यूं कहिए ईमानदारी से कमाने में मेहनत ज्यादा करनी पड़ रही है 👌

सोमवार, मई 27

दुर्घटना में कोई भी फंस सकता है। इसलिए सुरक्षा उपायों की जानकारी सबको अवश्य होनी चाहिए

आज की यह पोस्ट समर्पित है संपूर्ण मानव जाति को आप किस प्रकार बच सकते हैं जब कभी अग्निकांड होता है तो अभी कुछ दिन पहले गुजरात के सूरत शहर में एक कोचिंग सेंटर में आग लगने से लगभग 20 से अधिक बच्चों की जान चली गई अगर उन्हें आग से कुछ जानकारी होती तो शायद इतनी बड़ी तादाद में लोगों की जान नहीं जाती लेकिन जानकारी के अभाव में लोगों की जान चली गई आखिर कभी ऐसा हादसा हो जाए तो हमें क्या करना चाहिए यही बातें मैं आज की इस पोस्ट में आपको बताने वाला हूं.


 सूरत में हुए अग्निकांड में सभी को सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं इस ब्लॉग के माध्यम से.....😭😭😢😢🌹


     यह मैसेज जनसाधारण के लिए है और बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसे कृपया अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य और खासकर बच्चों को अवश्य पढ़ाएं और समझाएं:-

कई वर्ष पहले जे0 पी0 होटल वसंत विहार नई दिल्ली में आग की दुर्घटना हुई, जिसमें बहुत सारे भारतीय मारे गए लेकिन जापानी और अमेरिकन नहीं। जानते हैं क्यों? मैं आपको बताता हूँ:-

1.  सभी अमेरिकन और जापानी लोगों ने अपने कमरों के दरवाज़ों के नीचे खाली जगहों में गीले तौलिये लगा दिए और खाली जगहों को सील कर दिया, जिससे धुआं उनके कमरों तक नहीं पहुंच सका। या बहुत कम मात्रा में पहुंचा।


2.  इन सभी विदेशी मेहमानों ने अपनी नाक पर गीले रुमाल बांध लिए, जिससे उनके फेफड़ों में धुआं प्रवेश न कर सके।

3.  सभी विदेशी मेहमान अपने अपने कमरों के फर्श पर औंधे लेट गए। (क्योंकि धुआं हमेशा ऊपर की ओर उठता है)

इस प्रकार जब तक अग्निशमन विभाग के कर्मचारी आये, तब तक वे अपने आपको जीवित रख पाने में सफल रहे।

जबकि होटल के भारतीय मेहमानों को इन सुरक्षा उपायों के बारे में पता ही नहीं था इसलिए वे इधर से उधर भागने लगे और उनके फेफड़ों में धुआं भर गया और कुछ समय में ही उनकी मौत हो गई।

अभी (24.05.2019) को सूरत (गुजरात) के एक कोचिंग सेंटर में आग की दुर्घटना हुई जिसमें कई बच्चों की जान इस अज्ञानता और भगदड़ के कारण हो गई। यदि उन्हें इन सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी होती तो शायद इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की जान न जाती।

याद रखें, आग लगने की स्थिति में ज़्यादातर मौतें शरीर में धुआं जाने से होती हैं, जबकि आग के कारण कम होती हैं।

क्योंकि आग की स्थिति में हम लोग धैर्य से काम नहीं लेते हैं और इधर से उधर भागने लगते हैं। भागने से हमारी सांसें तेज़ हो जाती हैं जिसके कारण बहुत सारा धुआं हमारे फेफड़ों में प्रवेश कर जाता है और हम बेहोश हो जाते हैं और ज़मीन पर गिर जाते हैं तथा फिर आग की लपटों से घिर जाते हैं।

इसलिए आग लगने की स्थिति में ये सुरक्षा उपाय अपनाएं:-

1.  भगदड़ न मचाएं और अपने होश कायम रखें ताकि आप दूसरों की मदद कर सकें।

2.  अपने नाक पर गीला रुमाल या गीला लेकिन घना कपड़ा बांधें। तथा फर्श पर लेट जाएं।

3.  यदि आप किसी कमरे में बंद हों तो उसके खिड़की दरवाज़े बंद कर दें तथा उनके नीचे या ऊपर या कहीं से भी धुआं आने की संभावना हो तो उस जगह को भी गीले कपड़े से सील कर दें।

4   अपने आसपास के लोगों से भी ऐसा ही करने को कहें।

5.   अग्निशमन की सहायता की प्रतीक्षा करें। याद रखें, अग्निशमन वाले प्रत्येक कमरे की जांच करते हैं और वे फंसे हुए व्यक्तियों को ढूंढ लेंगे।

6.  यदि आपका मोबाइल काम कर रहा हो तो आप लगातार 100, 101 या 102 पर मदद के लिए कॉल करते रहें। उन्हें आप अपने स्थान की जानकारी भी दें। वे आप तक सबसे पहले पहुंचेंगे।

 सुगना फाउंडेशन मेघलासिया द्वारा जनहित में जारी....  
 Copy by sugana Foundation Meghlasiya
https://www.facebook.com/maasugana

दुर्घटना में कोई भी फंस सकता है। इसलिए सुरक्षा उपायों की जानकारी सबको अवश्य होनी चाहिए।

   अब अगर आप चाहे तो इस पोस्ट को कॉपी करके पेस्ट करिए लिंक शेयर करिए या कुछ भी करिए बट अधिक से अधिक लोगों तक यह जानकारी पहुंचाने में हमारी मदद कीजिए ताकि भविष्य में कभी ऐसा हादसा हो तो लोग अपनी जान बचा सके ।



शुक्रवार, सितंबर 28

आधार कार्ड पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला,जानें 10 बड़ी बातें फैक्‍ट फाइल

     आधार कार्ड की अनिवार्यता (Aadhaar verdict) पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अहम फैसला सुनाया

केंद्र के महत्वपूर्ण आधार कार्यक्रम और इससे जुड़े 2016 के कानून की संवैधानिक वैधता (Aadhaar constitutional validity) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत का फैसला पढ़ते हुए यह माना कि आधार आम आदमी की पहचान है.  कोर्ट ने कहा कि आधार के पीछे की सोच तार्किक है. आपको बता दें कि प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 38 दिनों तक चली लंबी सुनवाई के बाद 10 मई को मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. मामले में उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के एस पुत्तास्वामी की याचिका सहित कुल 31 याचिकाएं दायर की गयी थीं.

आइये जानते हैं इस फैसले से जुड़ी 10 बड़ी बातें. 
फैसले से जुड़ी खास बातें
1 सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखने वाले महाधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि "इस फैसले का असर बहुत दूर तक होगा, क्योंकि आधार बहुत-सी सब्सिडी से जुड़ा है.

2 मुकुल रोहतगी ने कहा कि आधार लूट और बरबादी को रोकने में भी कारगर है, जो होती रही हैं. डेटा की सुरक्षा बेहद अहम है, और सरकार यह स्पष्ट कर चुकी है कि वह डेटा की सुरक्षा करेगी. इस सिलसिले में कानून भी लाया जा रहा है..."

3 इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुनना शुरू किया. कहा कि आधार से समाज के बिना पढ़े-लिखे लोगों को पहचान मिली है और आधार का डुप्लीकेट बनाना संभव नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूनिक का मतलब सिर्फ एक से है.

4 सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह माना कि आधार आम आदमी की पहचान है और कहा कि आधार की वजह से निजता हनन के सबूत नहीं मिले हैं. सुप्रीम कोर्ट ने आधार की अनिवार्यता पर फैसला सुनाते हुए आधार की संवैधानिकता कुछ बदलावों के साथ बरकरार रखा.

5 सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार के बायोमीट्रिक डेटा की नकल नहीं की जा सकती. साथ ही कोई प्राइवेट पार्टी भी डेटा नहीं देख सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार का ऑथेंटिकेशन डाटा सिर्फ 6 महीने तक ही रखा जा सकता है.

6 सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूजीसी, सीबीएसई और निफ्ट जैसी संस्थाएं आधार नहीं मांग सकती हैं. साथ ही स्कूल भी आधार नहीं मांग सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवैध प्रवासियों को आधार न दिया जाए.

7 कोर्ट ने कहा कि मोबाइल और निजी कंपनी आधार नहीं मांग सकती हैं. कोर्ट ने आधार को मोबाइल से लिंक करने का फैसला भी रद्द कर दिया .कोर्ट ने आधार को बैंक खाते से लिंक करने के फैसले को भी रद्द कर दिया.

8 सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार से पैन कार्ड को जोड़ने का फैसला बरकरार रहेगा. जस्टिस सीकरी ने कहा, किसी भी बच्चे को आधार नंबर नहीं होने के कारण लाभ/सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता है.

9 सुप्रीम कोर्ट ने आधार अधिनियम की धारा 57 हटा दी. दूसरी तरफ अब कोर्ट की अनुमति के बिना आधार का बायोमेट्रिक डेटा किसी एजेंसी को नहीं दिया जाएगा. कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा मामलों में एजेंसियां आधार मांग सकती हैं.

10 सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार को रेगुलर बिल की तरह पारित किया जा सकता है. 2016 में इसे मनी बिल के तौर पर पारित किया गया था.

शुक्रवार, मार्च 10

स्वावलंबन जमीनीस्तर की सच्चाई इस घटना से कुछ लोगों को सबक लेना चाहिए

मुझे आज ऑटो रिक्शा में सफर करने का मौक़ा मिला जब मैं ऑटो में बैठा तो देखा कि ड्राइवर की गोद में एक छोटी लड़की है तो मैं समझा कि शायद बच्ची ने आज जिद की होगी कि अब्बु में भी साथ जाऊँगी या फिर उसे चलने से पहले उतार देगा मगर जब रिक्शा चला तो देखा कि वह बच्ची एक्सिलीटर दे रही है और इसका अबू दूसरी तरफ  पकड़कर उसे कह रहा है। रास्ते में सब कुछ देखता रहा और सुनता रहा जब मंजिल पर पहुंचे तो उसे किराया देने के बाद पूछा तो उस पर रिक्शा चालक ने मुझे बताया कि मैं इक हाथ से विकलांग(माजुर) हूँ इसलिए हम दोनों मिलकर रिक्शा चलाते हैं मुझे यह गवारा नहीं कि मेरी बेटी किसी के घर में सफाई करे और मे भिखारी बनूँ बच्ची को शिक्षा भी दिलवा रहा हूँ और घर  भी चल रहा है और खुदा का शुक्र अदा करता हूँ ख़ुशहाल जीवन गुजार रहा हूँ। यह सब जानकर बहुत खुशी हुई और साथ दिल में खुदा का खोफ भी पैदा हुआ कि हम तंदुरुस्त होने के बावजूदं खुदा का इतना शुक्र अदा नही करते जितना यह माजुर कर रहा है।

इस घटना से कुछ लोगों को सबक लेना चाहिए। और शर्म से डूब मरने का स्थान है उन लोगों के लिए जो इसको धंधा बनाया हुआ हे।जो माजुर का इस्तेमाल करते हैं भीख मंगवाने के लिए।और जो जानबूझकर माजुर बने हुए हे।आखीर खुदा की अदालत में भी पेश होना है।

यह पोस्ट फेसबुक/ WhatsApp की एकमात्र ऐसी पोस्ट स्वावलंबन+जमीनी स्तर की सच्चाई का सबसे बड़ा उदाहरण है ।
            


रविवार, मार्च 5

अद्भुत और बहुत उपयोगी जानकारी जो जरुरी है अपनानी

अद्भुत और बहुत उपयोगी जानकारी जो जरुरी है अपनानी।

अगर आप रोज़मर्रा की छोटी-छोटी समस्याओं से परेशान हैं, तो ये 14 आसान नुस्खे आपके लिए ही हैं।
अधिक से अधिक Share करे।

Source - Gazabpost


सोमवार, सितंबर 2

बाल विवाह एक अभिशाप ...सुगना फाउंडेशन-मेघलासिया



कानून द्वारा परिभाषित उम्र जो कि बालकों के लिये 21 वर्ष और बालिकाओं के लिये 18 वर्ष है, से कम उम्र में, किया गया विवाह, बाल-विवाह है। यह तो एक सामान्य तकनीकी परिभाषा है लेकिन इसकी व्यापकता और विकरालता को हम इस तरह से समझ सकते हैं कि बालविवाह, बच्चों के सभी बाल अधिकारों का उल्लंघन करता है । यह बच्चे के शिक्षा, स्वास्थ्य, सर्वांगीण विकास, सहभागिता और जीवन के अधिकार को चुनौती देता है। यद्यपि बाल विवाह काफी सदियों से चली आ रही एक कुरीति है जिससे भारत देश वर्तमान में भी अछूता नहीं है। पौराणिक काल में तो बाल विवाह की प्रथा तब नहीं थी। पुराणों में स्वयंवर, गंधर्व विवाह, असुर विवाह आदि का भी उल्लेख तो मिलता है लेकिन बाल विवाह का उल्लेख कहीं भी नहीं मिलता है। बाल विवाह तो देन है मध्ययुग की, जब कि बालिकाओं को आतताईयों की कुदृष्टि से बचाने के लिये अभिभावक उन्हें विकसित होने के पूर्व ही विवाह के बंधन में बांधने लगे। इस मध्ययुग में जब बाल विवाह प्रचलन में आया तब से अब तक कई विवाह ऐसे हुयें हैं जिसमें तो वर-वधू बने बच्चे अंगूठा चूसते हुए मां की गोद में बैठे रहते हैं , तो कई झूलों में ही कर दिये जाने की जानकारी भी प्राप्त होती है, तो अनेक मामलों में दस-ग्यारह वर्ष की उम्र में ही शादी कर दी जाती है। इस आयु में बच्चे न तो शारीरिक तथा न ही मानसिक रूप से ही विवाह जैसी गंभीर जिम्मेदारी निभाने के लायक होते हैं। दरअसल में जितना यह सामाजिक सवाल है उससे ज्यादा कहीं राजनैतिक है। जब तक इस समस्या को राजनैतिक दृष्टि से नहीं देखा जायेगा तब तक इसके हल होने की संभावना नगण्य है। ग्रामीण अंचल व पिछड़े इलाकों में आज भी पुरातन परम्पराओं अर्थात हमारी रुड़ीवादी सोच का ही नतीजा है कि आज भी समाज में हम वही पुरानी सोच लिए बैठे हैं और इसके चलते काफी संख्या में बाल-विवाह सम्पन्न होते है।

 आखिर बालविवाह क्यों ?

सामाजिक सोच क्या है? इसके बारे में तो कुछ नहीं कहा जा सकता।
पर मेरा निजी विचार ये है कि जब इसमें लड़की पक्ष का ज्यादा हाथ होता है क्योंकि लड़की पक्ष में प्राय: ये देखा जाता है कि लड़का अमीर खानदान से हैं, अच्छे परिवार(संस्कार) से है। और सोचते हैं कि लड़की खुश रहेगी इसी सोच के आधार पर लड़की पक्ष के लोग अपनी बेटी के भविष्य का भला सोचते हुए शादी कर देते है उम्र को नज़रअंदाज करते हुए, वो नहीं चाहते की कोई अच्छा रिश्ता हाथ से निकल जाए। बालविवाह का सीधा संबंध बालक-बालिका पर असमय जिम्मेदारी लादने से शुरु होता है और बाद में स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों पर जा ठहरता है। बालविवाह बच्चों को उनके बचपन से भी वंचित कर देता हैं ।

आखिर क्यों किये जाते हैं बाल विवाह? बालविवाह के पक्षधर इस संबंध में तर्क देते हैं कि :
1) बड़ी होने पर लड़की की सुरक्षा कौन करेगा ? -बालिकाओें की सुरक्षा एक गंभीर मामला है।
2) कम उम्र में क्यूंकि लड़का भी कम पढ़ा लिखा होगा तो वर पक्ष की दहेज संबंधी मांग भी कम रहेगी अर्थात लड़की को आर्थिक बोझ की दृष्टी से देखना
3) छोटी उम्र में चयन के विकल्प (वर तथा परिवार) खुले होते हैं।
4) लड़कियों को कम रुतबा दिया जाना अर्थात लड़कियों की शिक्षा का निचला स्तर
5) लड़की को आर्थिक बोझ समझना अर्थात वो सोचते हैं की लड़की तो बोझ होती है जितनी जल्दी यह जिम्मेदारी खत्म हो सके उतना ही अच्छा है।
6) यदि बड़ी होकर लड़की ने कोई गलत कदम उठा लिया (स्वयं वर ढूंढ लिया) तो समाज को कौन समझायेगा ?
7) विवाह चाहे कम उम्र में करते हैं पर विदा तो लड़की को समझदार होने के बाद ही करेंगें।
 सामाजिक प्रथाएं एवं परम्पराएं(रुड़ीवादी सोच)
9) जागरूकता की कमी अर्थात शिक्षा का प्रचार-प्रसार की अभाव
10) लड़की दूसरे घर में जल्दी सामंजस्यता बिठा लेती है।
11) लड़की पक्ष के लोग ये नहीं चाहते की कोई भी अच्छा रिश्ता हाथ से निकल जाए,इसीलिए भी वो शादी करते समय उम्र को नज़रअंदाज कर देते है
12) लड़के पक्ष के मन में हमेशा लगातार लड़कियों की संख्या का गिरता ग्राफ रहता है, इसिलिय जब उन्हें कोई अच्छे परिवार से रिश्ता आया होता है तो वो भी उम्र की सीमा को ध्यान में न रखते हुए शादी कर देते हैं।

इन सब कारणों से बाल विवाह हमारे समाज में अभी तक किये जाते रहे हैं व इन तर्कों के आगे इन बच्चों का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक व शैक्षणिक विकास कहीं गौण/नगण्य/तुच्छ हो जाता है। दरअसल में यह समस्या एक जटिल रुप धारण किये हुये हैं । गरीबी और निरक्षरता भी इसका एक प्रमुख कारण है। इस कुरीति के पीछे कई और कुरीतियां भी हैं जैसे दहेज प्रथा-दहेज प्रथा के कारण भी लोग जल्दी शादी कर देते हैं क्योंकि इस समय तक वर की अपनी इच्छायें सामने नहीं आती हैं और शादी सस्ते में निपट जाती है।

बाल विवाह के कुप्रभाव/दुष्परिणाम :-
जो लड़कियां कम उम्र में विवाहित हो जाती हैं उन्हें अक्सर 
1) कम उम्र की लड़कियां, जिनके पास रुतबा, शक्ति एवं परिपक्वता नहीं होते, अक्सर घरेलू हिंसा सम्बन्धी ज़्यादतियों एवं सामाजिक बहिष्कार का शिकार होती हैं। 
2) कम उम्र में विवाह लगभग हमेशा लड़कियों को शिक्षा या अर्थपूर्ण कार्यों से वंचित करता है जो उनकी निरंतर गरीबी का कारण बनता है।
3) बाल विवाह लिंगभेद, बीमारी एवं गरीबी के भंवरजाल में फंसा देता है।
4) जब वे शारीरिक रूप से परिपक्व न हों, उस स्थिति में कम उम्र में लड़कियों का विवाह कराने से मातृत्व सम्बन्धी एवं शिशु मृत्यु की दरें अधिकतम होती हैं।
5) आपसी वैचारिक मतभेदों के कारण रिश्ता/शादी टूटने(तलाक) की संभावनाएं ज्यादा प्रबल होती है।
6) भगवान न करें पर यदि विवाह के पश्चात पति की मृत्यु हो जाती है तो लड़की को उम्र भर के लिए विधवा का जीवन यापन करना पड़ेगा, बाल विधवा किसी भी समाज व परिवार के लिए शुभ कभी नहीं कही जा सकती, तत्पश्चात उसका(लड़की) जीवन नरकमय हो जाता है।

सुगना फाउंडेशन-मेघलासिया


अभी ब्याहने की क्या जल्दी, थोड़ा लिख-पढ़ जाने दो।
प्रेम और ममता की मूरति, पूरी तो गढ़ जाने दो।।

अभी खेलने के दिन इसके, हुआ न बचपन पूरा है।
कच्ची कली अभी बगिया की, बचपन अभी अधूरा है।।
अभी बृद्धि की ओर बेल है, थोड़ी-सी बढ़ जाने दो।
अभी ब्याहने की क्या जल्दी, थोड़ा लिख-पढ़ जाने दो।।

जीवन बगिया में तितली का, सैर-सपट्टा होने दो।
कच्ची गागरिया के तन को, कुछ तो पक्का होने दो।।
अभी-अभी तो हुआ सबेरा, धूप तनिक चढ़ जाने दो।
अभी ब्याहने की क्या जल्दी, थोड़ा लिख-पढ़ जाने दो।।

करके पीले हाथ उऋण हैं, समझो यह नादानी है।
तुमने लिख दी एक कली की, फिर से दुःखद कहानी है।।
चन्द्रकला की छटा धरा पर, थोड़ी-सी इठलाने दो।
अभी ब्याहने की क्या जल्दी, थोड़ा लिख-पढ़ जाने दो।।

तनिक भूल से जीवन भर तक, दिल का दर्द बहा करता।
अगर न सुदृढ़ नींव होइ तो, सुन्दर महल ढहा करता।।
चिड़िया के सँग-सँग बच्चों को, थोड़ा-सा उड़ जाने दो।
अभी ब्याहने की क्या जल्दी, थोड़ा लिख-पढ़ जाने दो।।

वैसे हमारे देश में बालविवाह रोकने के लिए कानून मौजूद है, लेकिन कानून के सहारे इसे रोका नहीं जा सकता। बालविवाह एक सामाजिक समस्या है। अत:इसका निदान सामाजिक जागरूकता से ही सम्भव है | इस सामाजिक अपराध को समाप्त करने के लिए समाज के युवा वर्ग को आगे आना होगा। केवल सरकार के प्रयासों से या कोई कानून बना देने मात्र से ही कोई भी सामाजिक बुराई समाप्त नहीं हो सकती। उनके उन्मूलन/निवारण की जिम्मेदारी पूरे समाज पर है।

बाल विवाह जैसी बुराइयों को दूर करने के लिए युवा वर्ग के साथ-साथ स्वयं सेवी संस्थाओं की भागीदारी भी जरूरी है। समाज में जागरूकता की लहर की शुरुआत ही युवा वर्ग से होनी चाहिए। स्कूलों और कॉलेजों में सामाजिक बुराइयों को दूर करने संबंधी वाद-विवाद एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाना चाहिए। उन्हे शिक्षा प्राप्त करने, दहेज न लेने, दहेज न देने, अपने आस-पास बाल-विवाह को रोकने का संकल्प दिलवाना चाहिए। इसी प्रकार के कारगर एवं सकारात्मक कदम ग्राम पंचायतें, समाज कल्याण संस्थाएं, आंगनबाड़ियां और स्वयंसेवी संस्थाएं भी उठाए, तो समाज में जागरूकता लाना संभव है।

सामाजिक कुरीतियों की समाप्ति के लिए सब से पहले यह बहुत जरूरी है कि हर व्यक्ति शिक्षा प्राप्त करे। सभी स्कूल जाने योग्य बच्चों का स्कूलों में पंजीकरण करके उनकी नियमित शिक्षा को सुनिश्चित किया जाए, विशेष रूप से नारी शिक्षा को प्रोत्साहित किया जाना बहुत जरूरी है। शिक्षित लोग ही एक स्वस्थ समाज का नव निर्माण करने में सक्षम होते है। इस दिशा में जन साधारण अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

जिन परिवारों/घरों में बाल-विवाह हुआ था और अब बच्चे(लड़का-लड़की) खुश नहीं है उस वैवाहिक जीवन से तो वो बहुत बड़ा सहयोग/योगदान दे सकते हैं इस बुराई का अंत करने में, मेरा मानना ये है की उनको भी आगे आना चाहिए और आज के समाज को जागरूक करना चाहिए कि जो गलती उन्होंने की थी वो अब फिर से कोई न करें{(पर अगर यहाँ भी मन(हृदय की बात) से कहूं तो कोई आगे नहीं आएगा क्यूंकि कोई भी खुश नहीं होता किसी दुसरे को खुश देखकर, उसकी सोच रहती है कि मैं खुश नहीं हूँ तो कोई दूसरा भी खुश क्यों हो, हम इस बात से जयादा दु:खी नहीं होते की हमारी समस्या का कोई समाधान नहीं है बल्कि इस बात से ज्यादा दु:खी की उसके(दुसरे) पास कोई समस्या ही क्यों नहीं है)}

समय तो लगेगा पर इस प्रथा किया बंद किया जा सकता है क्यूंकि इस प्रथा को चलाने वाले भी हम ही है और अगर हम चला सकते हैं तो रोक भी तो सकते हैं बस जरूरत है तो समाज को जागरूक करने की और इसकी शुरुआत भी हमें हमारी खुद की सोच को बदलकर करनी होगी।
एक पंक्ति उनके लिए जो जिन्हें शंका है की क्या ये बंद भी हो सकती है:
कौन कहता है की आसमां में छेद हो नहीं सकता? एक पत्थर तो तबियत से उछालो भाइयों/बहनों/मित्रों।

(ये सुझाव श्री गुरु जम्भेश्वर पेज की बाल-विवाह सम्बन्धित पिछली पोस्ट पर आई टिप्पणी से जुड़ा है)

अगर किसी घर/परिवार में अभी तक विवाह ही हुआ है और लड़की को विदा(ससुराल नहीं भेजा है) नहीं किया है और दोनों-पक्षों(लड़का-लड़की) के विचार नहीं मिल रहे हैं तो?
जिन परिवारों/घरों में अभी तक विवाह तो गया है पर अगर लड़की और लड़के पक्ष में इससे सहमत नहीं है तो उनको दोनों पक्षों की सहमती से उस रिश्ते को यहीं खत्म कर देना चाहिए, क्यूंकि ये सिर्फ दिन,सप्ताह या महीने की बात नहीं है की कैसे भी कट जाएगा ये समय। ये तो पूरी ज़िन्दगी का बन्धन है। इसीलिए इससे पहले की रिश्ता बोझ बन जाए उसे खत्म करना ही सही है। मेरे घर में मेरे दादा जी एक कहावत बोलते हैं वो यहाँ पूर्ण सही बैठ रही है कि : कि "पग्ड़े ग़ी गोली हूँ आज गा लट्ठ ज्यादा ठीक है"

यानी जो रिश्ता कल मनमुटाव के साथ खत्म होने वाला है अगर उसे ख़ुशी से आज ही खत्म कर दिया जाए तो वो बहुत ज्यादा बेहतर है।

आपसे भी विनती है की आप भी अपने विचार(शंका) और सुझाव बताएं जिससे इस सामाजिक बुराई को मिटाया जा सके और समाज का उत्थान हो सके। 
धन्यवाद।।
साभार पेज 
श्री गुरु जंभेश्वर  
द्वारा : दीपिका जांगू 

मंगलवार, अगस्त 20

सुगना फाउंडेशन-मेघलासिया परिवार की और से रक्षा बंधन कि हार्दिक शुभकामनाएं.


 सुगना फाउंडेशन-मेघलासिया परिवार की और से सभी भाई और बहनों को रक्षा बंधन कि हार्दिक शुभकामनाएं..


रक्षा बंधन का पर्व एक ऎसा पर्व है, जो धर्म और वर्ग के भेद से परे भाई - बहन के स्नेह की अट्टू डोर का प्रतीक है. बहन द्वारा भाई को राखी बांधने से दोनों के मध्य विश्वास और प्रेम का जो रिश्ता बनता है, उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता है. रक्षा बंधन की पर्व का सबसे खूबसूरत पहलू यही है कि यह पर्व धर्म ओर जाति के बंधनों को नहीं मानता. अपने इसी गुण के कारण आज इस पर्व की सराहना पूरी दुनिया में की जाती है!

रक्षाबंधन के पावन पर्व पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

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